Wednesday, May 8, 2019

प्रारंभिक वैदिक काल (1500 ईसा पूर्व - 1000 ईसा पूर्व) | उत्तर वैदिक काल (1000 ईसा पूर्व - 500 ईसा पूर्व)

प्रारंभिक वैदिक काल (1500 ईसा पूर्व - 1000 ईसा पूर्व) | उत्तर वैदिक काल (1000 ईसा पूर्व - 500 ईसा पूर्व)

प्रारंभिक वैदिक काल (1500 ईसा पूर्व - 1000 ईसा पूर्व) | उत्तर वैदिक काल (1000 ईसा पूर्व - 500 ईसा पूर्व)


भारतीय इतिहास
भारत के इतिहास को अगर विश्व के इतिहास के महान अध्यायों में से एक कहा जाए तो इसे अतिश्योक्ति नहीं कहा जा सकता। इसका वर्णन करते हुए भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु ने कहा था, ‘‘विरोधाभासों से भरा लेकिन मजबूत अदृश्य धागों से बंधा’’। भारतीय इतिहास की विशेषता है कि वो खुद को तलाशने की सतत् प्रक्रिया में लगा रहता है और लगातार बढ़ता रहता है, इसलिए इसे एक बार में समझने की कोशिश करने वालों को ये मायावी लगता है। 

इस अद्भुत उपमहाद्वीप का इतिहास लगभग 75,000 साल पुराना है और इसका प्रमाण होमो सेपियंस की मानव गतिविधि से मिलता है। यह आश्चर्य की बात है कि 5,000 साल पहले सिंधु घाटी सभ्यता के वासियों ने कृषि और व्यापार पर आधारित एक शहरी संस्कृति विकसित कर ली थी। 

युगों के अनुसार भारत का इतिहास इस प्रकार हैः

1. पूर्व ऐतिहासिक काल

पाषाण युगः
पाषाण युग 500,000 से 200,000 साल पहले शुरू हुआ था और तमिलनाडु में हाल ही में हुई खोजो में इस क्षेत्र में सबसे पहले मानव की उपस्थिति का पता चलता है। देश के उत्तर पश्चिमी हिस्से से 200,000 साल पहले के मानव द्वारा बनाए हथियार भी खोजे गए हैं। 

कांस्य युगः
भारतीय उपमहाद्वीप में कांस्य युग की शुरुआत लगभग 3,300 ईसा पूर्व सिंधु घाटी सभ्यता के साथ हुई थी। प्राचीन भारत का एक ऐतिहासिक हिस्सा होने के अलावा यह मेसोपोटामिया और प्राचीन मिस्त्र के साथ साथ विश्व की शुरुआती सभ्यताओं में से एक है। इस युग के लोगों ने धातु विज्ञान और हस्तशिल्प में नई तकनीक विकसित की और तांबा, पीतल, सीसा और टिन का उत्पादन किया। 

2. प्रारंभिक ऐतिहासिक काल

वैदिक कालः
भारत पर हमला करने वालों में पहले आर्य थे। वे लगभग 1,500 ईसा पूर्व उत्तर से आए थे और अपने साथ मजबूत सांस्कृतिक परंपरा लेकर आए। संस्कृत उनके द्वारा बोली जाने वाली सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक थी और वेदों को लिखने में भी इसका उपयोग हुआ जो कि 12वीं ईसा पूर्व के हंै और प्राचीनतम ग्रंथ माने जाते हैं।

वेदों को मेसोपोटामिया और मिस्त्र ग्रंथों के बाद सबसे पुराना ग्रंथ माना जाता है। उपमहाद्वीप में वैदिक काल लगभग 1,500-500 ईसा पूर्व तक रहा और इसमें ही प्रारंभिक भारतीय समाज में हिंदू धर्म और अन्य सांस्कृतिक आयामों की नींव पड़ी। आर्यों ने पूरे उत्तर भारत में खासतौर पर गंगा के मैदानी इलाकों में वैदिक सभ्यता का प्रसार किया। 
महाजनपदः
इस काल में भारत में सिंधु घाटी सभ्यता के बाद शहरीकरण का दूसरा सबसे बड़ा उदय देखा गया। ‘महा’ शब्द का अर्थ है महान और ‘जनपद’ का अर्थ है किसी जनजाती का आधार। वैदिक युग के अंत में पूरे उपमहाद्वीप में कई छोटे राजवंश और राज्य पनपने लगे थे। इसका वर्णन बौद्ध और जैन साहित्यों में भी है जो कि 1,000 ईसा पूर्व पुराने हैं। 500 ईसा पूर्व तक 16 गणराज्य या कहें कि महाजनपद स्थापित हो चुके थे, जैसे कासी, कोसाला, अंग, मगध, वज्जि या व्रजी, मल्ला, चेडी, वत्स या वम्स, कुरु, पंचाला, मत्स्य, सुरसेना, असाका, अवंति, गंधारा और कंबोजा। 

फारसी और यूनानी विजयः
उपमहाद्वीप का ज्यादातर उत्तर पश्चिमी क्षेत्र, जो कि वर्तमान में पाकिस्तान और अफगानिस्तान है, में फारसी आक्मेनीड साम्राज्य के डारियस द ग्रेट के शासन में सी. 520 ईसा पूर्व में आया और करीब दो सदियों तक रहा। 326 ईसा पूर्व में सिकंदर ने एशिया माइनर और आक्मेनीड साम्राज्य पर विजय पाई फिर उसने भारतीय उपमहाद्वीप की उत्तर पश्चिमी सीमा पर पहुंचकर राजा पोरस को हराया और पंजाब के ज्यादातर इलाके पर कब्जा किया। 

मौर्य साम्राज्यः
मौर्य वंशजों का मौर्य साम्राज्य 322-185 ईसा पूर्व तक रहा और यह प्राचीन भारत के भौगोलिक रुप से व्यापक एवं राजनीतिक और सैन्य मामले में बहुत शक्तिशाली राज्य था। चन्द्रगुप्त मौर्य ने इसे उपमहाद्वीप में मगध, जो कि आज के समय में बिहार है, में स्थापित किया और महान राजा अशोक के शासन में यह बहुत उन्नत हुआ। 

प्राचीन भारतीय इतिहास का घटनाक्रम

प्रागैतिहासिक कालः 400000 ई.पू.-1000 ई.पू. : यह वह समय था जब सिर्फ भोजन इकट्ठा करने वाले मानव ने आग और पहिये की खोज की। 

सिंधु घाटी सभ्यताः 2500 ई.पू.-1500 ई.पू. : इसका यह नाम सिंधु नदी से आया और यह कृषि करके उन्नत हुई। यहां के लोग प्राकृतिक संसाधनों की भी पूजा करते थे। 

महाकाव्य युगः 1000 ई.पू.-600 ई.पू. : इस कालखण्ड में वेदों का संकलन हुआ और वर्णों के भेद हुए जैसे आर्य और दास। 

हिंदू धर्म और परिवर्तनः 600 ई.पू.-322 ई.पू. : इस समय में जाति प्रथा बहुत सख्त हो गई थी और यही वह समय था जब महावीर और बुद्ध का आगमन हुआ और उन्होंने जातिवाद के खिलाफ बगावत की। इस काल में महाजनपदों का गठन हुआ और बिम्बिसार के शासन में मगध आया, अजात शत्रु, शिसुनंगा और नंदा राजवंश बने। 

मौर्य कालः 322 ई.पू.-185 ई.पू. : चन्द्रगुप्त मौर्य द्वारा स्थापित इस साम्राज्य के तहत् पूरा उत्तर भारत था और बिंदुसारा ने इसे और बढ़ाया। इस काल में हुए कलिंग युद्ध के बाद राजा अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाया।

आक्रमणः 185 ई.पू.-320 ईसवीः इस अवधि में बक्ट्रियन, पार्थियन, शक और कुषाण के आक्रमण हुए। व्यापार के लिए मध्य एशिया खुला, सोने के सिक्कों का चलन और साका युग का प्रारंभ हुआ। 

डेक्कन और दक्षिणः 65 ई.पू.-250 ईसवीः इस काल में दक्षिण भाग पर चोल, चेर और पांड्या का शासन रहा और इसी समय में अजंता एलोरा गुफाओं का निर्माण हुआ, संगम साहित्य और भारत में ईसाई धर्म का आगमन हुआ। 

गुप्त साम्राज्यः 320 ईसवी-520 ईसवीः इस काल में चन्द्रगुप्त प्रथम ने गुप्त साम्राज्य की स्थापना की, उत्तर भारत में शास्त्रीय युग का आगमन हुआ, समुद्रगुप्त ने अपने राजवंश का विस्तार किया और चन्द्रगुप्त द्वितीय ने शाक के विरुद्ध युद्ध किया। इस युग में ही शाकुंतलम और कामसूत्र की रचना हुई। आर्यभट्ट ने खगोल विज्ञान में अद्भुत कार्य किए और भक्ति पंथ भी इस समय उभरा। 

छोटे राज्यों का कालः 500 ईसवी-606 ईसवीः इस युग में हूणों के उत्तर भारत में आने से मध्य एशिया और ईरान में पलायन देखा गया। 

उत्तर में कई राजवंशों के परस्पर युद्ध करने से बहुत से छोटे राज्यों का निर्माण हुआ। 

हर्षवर्धनः 606 ई-647 ईसवीः हर्षवर्धन के शासनकाल में प्रसिद्ध चीनी यात्री हेन त्सांग ने भारत की यात्रा की। हूणों के हमले से हर्षवर्धन का राज्य कई छोटे राज्यों में बँट गया। 

यह वह समय था जब डेक्कन और दक्षिण बहुत शक्तिशाली बन गए। 

दक्षिण राजवंशः 500ई-750 ईसवीः इस दौर में चालुक्य, पल्लव और पंड्या साम्राज्य पनपा और पारसी भारत आए। 

चोल साम्राज्यः 9वीं सदी ई-13वीं सदी ईसवीः विजयालस द्वारा स्थापित चोल साम्राज्य ने समुद्र नीति अपनाई।

अब मंदिर सांस्कृतिक और सामाजिक केन्द्र होने लगे और द्रविडि़यन भाषा फलीफूली। 

उत्तरी साम्राज्यः 750ई-1206 ईसवीः इस समय राष्ट्रकूट ताकतवर हुआ, प्रतिहार ने अवंति और पलस ने बंगाल पर शासन किसा। इस दौर ने राजपूत कुलों का उदय देखा। 

खजुराहो, कांचीपुरम, पुरी में मंदिरों का निर्माण हुआ और लघु चित्रकारी शुरु हुई। इस अवधि में तुर्कों का आक्रमण हुआ। 


 

पूर्व वैदिक काल (1500 ईसा पूर्व- 1000 ईसा पूर्व)

इस काल में ज्ञान का एक मात्र स्रोत, ऋगवेद है। ऋगवेद विश्‍व का सबसे प्राचीन ग्रंथ है। इस वेद में 1028 भजनों को 10 मंडलों में विभाजित किया गया है। वैदिक साहित्‍य की रचना संस्‍कृत भाषा में की गई है। वेदों के साथ प्रारंभ करते हुए इसकी व्‍याख्‍या की गई थी, लिखा नहीं गया था। इन्‍हें मौखिक विधियों से पढ़ाया जाता था इसीलिए इन्‍हें श्रुति (सुना) और स्‍मृति (याद किया) कहा जाता था। लेकिन बाद में लिपियों के अविष्‍कार के बाद लेखन में इनका कम प्रयोग किया जाने लगा।

1. मूल स्‍थान, पहचान और भौगोलिक क्षेत्र
  1. आर्यो को उनके समान भारतीय-यूरोपीय भाषा परिवारों के रूप में जाना जाता था, जो कि यूरेशियन क्षेत्रों में व्‍यापक रूप से प्रसारित थे।
  2. मैक्‍स मुलर का तथ्‍य है कि वे मध्‍य एशिया/ मैदानी भाग में रह चुके थे, जिन्‍होंने फिर बाद में भारतीय उप-महाद्वीप पर आक्रमण किया था। भारतीय-यूरोपीय भाषा में कुछ निश्चित जानवरों और समान पौधों के नामों को सबूतों के रूप में रखा गया है।
  3. गांव से संबंधित होने के कारण चरवाहा मुख्‍य व्‍यवसाय था जब कि कृषि कार्य द्वितीयक व्‍यवसाय के रूप में था। चरवाहे के जीवन में घोड़ा मुख्‍य भूमिका निभाता था, जिसे काले समुद्र के पास पाला जाता था।
  4. पद –आर्य, ऋगवेद में 36 बार आया है जो आर्यों को सांस्‍कृतिक समुदाय के रूप में दर्शाता है।
  5. आर्य 1500 ईसा पूर्व के दौरान भारत में आये और पूर्वी अफगानिस्‍तान, एन.डब्‍ल्‍यू.एफ.पी, पंजाब और पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश के किनारों के पास बस गए। इस पूरे क्षेत्र को सात नदियों की धरती के नाम से जाना जाता था।
  6. आर्यों का उनके स्‍वदेशी निवासी दस्‍युस से संघर्ष हुआ और आर्यों के प्रमुख जिन्‍होंने उनसे जबरदस्‍ती की उन्‍हें त्रसादस्‍यु कहा जाता था।
  7. सप्‍त सिंधु को ऋगवेद में प्रदर्शित‍ किया गया है। सिंधु, सर्वोत्‍कृष्‍ट नदी है, जब कि सरस्‍वती अथवा नदीतरण ऋगवेद की नदियों में से सर्वश्रेष्‍ठ है।
ऋगवैदिक नाम आधुनिक नाम
सिंधु सिंधु
वितस्‍ता झेलम
असिकनी चिनाब
परूशनी रावी
विपास बीस
सुतुद्री सतलुज
2. जनजातीय संघर्ष
  1. आर्यो ने भारत और पश्चिमी एशिया में पहली बार घोड़ों से चलने वाले रथों की शुरूआत की। वे शस्‍त्रों और वर्मनों से पूर्णत: सुसज्जित रहते थे। जिसने सभी जगहों पर उनकी जीत की सफलता का मार्ग प्रशस्‍त किया।
  2. आर्यों को पांच जनजातियों में बांटा गया, जिन्‍हें पंचजन कहा जाता था, वे आपस में लड़ते रहे।
  3. दस राजाओं की युद्धभूमि अथवा दसराजन युद्ध थी, यह युद्ध भारत के राजा सुदास के खिलाफ पांच आर्यों और पांच गैर-आर्यों के बीच लड़ा गया था जिसमें भारत जीता था। वे बाद में पुरूस के साथ जुड़ गए और एक नईं जनजाति स्‍थापित की जिसका नाम कुरूस था जो गंगा के ऊपरी मैदानी भागों पर शासन करती थी।
3. भौतिक जीवन और अर्थव्‍यवस्‍था
  1. उनकी सफलता का श्रेय रथों, घोड़ों और कांसे के बने बेहतर हथियारों के प्रयोग को जाता है। उन्‍होंने तीली वाले पहिये का अविष्‍कार भी किया।
  2. उन्‍हें कृषि का अच्‍छा ज्ञान था जिसका प्रयोग मुख्‍य रूप से चारे का उत्‍पादन करने में किया जाता था। ऋगवेद में यह बताया गया है कि धार-फार, लकड़ी का बना होता था।
  3. वे गायों के लिए युद्ध करते थे। गायों को ढूंढने को गविष्‍ठी कहा जाता था। उनके जीवन में जमीन महत्‍वपूर्ण नहीं थी।
  4. आर्य शहरों में कभी नहीं रहे।
4. जनजातीय राजनीति
  1. अवधि की सभाएं- सभा, समिति, विदाथा और गण
  2. दो सबसे महत्‍वपूर्ण विधान सभाएं, सभा और समिति थी। सभा और विदाथा में महिलाएं भाग लेती थीं।
  3. बली- लोगों के द्वारा दिया गया स्‍वैच्छिक योगदान
  4. राजा ने एक सामान्‍य स्‍थायी सेना नहीं रखी थी। यहां पर सरकार की जनजातीय व्‍यवस्‍था थी जिसमें सैन्‍य तत्‍व एक तंतु समान थे। सैन्‍य कार्य विभिन्‍न जनजातियों के द्वारा किया जाता था जिन्‍हें व्रत, गण, ग्राम, सर्धा कहा जाता था।
  5. महत्‍वपूर्ण पद:-
    1. जनजातीय प्रमुख- राजन – राजा का पद वंशानुगत था। राजा का चुनाव समिति के द्वारा किया जाता था।
    2. पुरोहित – महायाजक – विश्‍वामित्र और वशिष्‍ठ। विश्‍वामित्र ने गयत्री मंत्र की रचना की थी।
    3. सेनानी – सेना प्रमुख – जो भाले, कुल्‍हाड़ी और तलवार का प्रयोग करता था
    4. कर अधिकारी और न्‍याय प्रशासनिक अधिकारी के बारे में कोई जानकारी प्राप्‍त नहीं हो सकी है।
    5. व्रजपति – वह अधिकारी जिसका बड़े भू-भाग पर अधिकार होता था। वे कुलपास कहे जाने वाले परिवार के मुखिया का प्रतिनिधित्‍व करता था और युद्धक समूहों के प्रमुखों जिन्‍हें ग्रामीणों से युद्ध भूमि कहा जाता था, का प्रतिनिधित्‍व करता था।
5. जनजाति और परिवार
  1. भाईचारा, सामाजिक ढांचे का आधार था।
  2. प्राथमिक राजभक्ति, जन अथवा जनजाति को दी गई थी। ऋगवेद में लगभग 275 बार जन शब्‍द का प्रयोग किया गया है। जनजातियों के एक अन्‍य शब्‍द विस है जिसका ऋगवेद में 170 बार वर्णन किया गया है। ग्राम, छोटी जनजातीय इकाईयां होती थीं। ग्रामों के बीच के संघर्ष को समग्राम कहा जाता था।
  3. कुल, वह पद जो परिवार के लिए प्रयोग किया जाता था उसका बहुत कम प्रयोग किया गया है। परिवार को गृह के द्वारा प्रदर्शित किया गया है।
  4. पितृात्‍मक समाज और पुत्र का जन्‍म, युद्ध लड़ने की इच्‍छा के सूचक थे।
  5. महिलाएं विधानसभाओं में शामिल हो सकती थीं, त्‍याग कर सकती थीं और भजन गाती थीं।
  6. कईं पति रखने वाली महिलाएं, महिला पुर्नविवाह और लीवरेट पाये गए थे लेकिन बाल विवाह का प्रचलन नहीं था।
6. सामाजिक बंटवारा
  1. वर्ण, रंग के लिए प्रयोग किया जाने वाला पद है।
  2. दास और दसयुस से गुलामों और शूद्रों के रूप में व्‍यवहार किया जाता था। ऋगवेद में आर्य वर्ण और दस वर्ण का वर्णन किया गया है।
  3. व्‍यवसाय के आधार पर चार वर्गों- योद्धा, संत, व्‍यक्ति और शूद्र में वर्गीकृत किया गया है लेकिन यह वर्गीकरण ज्‍यादा गहन नहीं था।
  4. समाजिक असमानताएं दिखना प्रारंभ हो गई थीं लेकिन समाज अभी तक आदिवासी और बड़े पैमाने पर समतावादी थे।
7. ऋगवैदिक देवता
  1. प्रकृति की पूजा की जाती थी।
  2. विभिन्‍न देवताओं की विशेषताएं-
    इंदिरा – पुरंदरा – 250 स्रोत
    अग्नि – अग्नि देवता – 200 स्रोत
    वरूण – प्राकृतिक क्रम को बनाए रखना
    सोम – पौधों के देवता
    मारूत – तूफानों की प्रतीकत्‍व करना
    अदिति और ऊषा – देवियां – सुबह की पहली किरण की मौजूदगी को प्रदर्शित करना
  3. पूजा करने का प्रमुख तरीका- प्रार्थना और त्‍याग था लेकिन पूजा परंपराओं और बलि के प्रावधान में शामिल नहीं की गई थी। उनकी पूजा उनके भौतिक जीवन की इच्‍छाओं को पूरा करने और भलाई हेतु थीं।

उत्तर वैदिक काल (1000 ईसा पूर्व - 500 ईसा पूर्व)


वैदिक चरण के बाद (1000 ईसा पूर्व - 500 ईसा पूर्व)

वैदिक काल के बाद का इतिहास मुख्य रूप से वैदिक ग्रंथों पर आधारित है जो कि ऋग्‍वेद आधार पर संकलित है।

1. उत्तर वैदिक ग्रंथ

a. वेद संहिता
  1. सामवेद – ऋग्‍वेद से लिए गए भजनों के साथ मंत्रों की पुस्तक। यह वेद भारतीय संगीत के लिए महत्वपूर्ण है।
  2. यजुर्वेद – इस पुस्तक में यज्ञ सम्बन्धी कर्मकांड और नियम सम्मिलित हैं।
  3. अथर्ववेद – इस पुस्तक में बुराइयों और रोगों के निवारण के लिए उपयोगी मंत्र शामिल हैं|
b. ब्राह्मणसभी वेदों के व्याख्यात्मक भाग होते हैं। बलिदान और अनुष्ठानों की भी बहुत विस्तार से चर्चा की गई है।
  1. ऋग्‍वेदऐत्रेय और कौशितिकी ब्राह्मण
  • 10 मंडल (किताबें) में विभाजित 1028 स्तोत्र शामिल हैं
  • तृतीय मंडल में, गायत्री मंत्र, देवी सावित्री से संबोधित है।
  • X मंडल पुरुषा सुक्ता से सम्बंधित हैं
  • एत्रेय और कौशितिकी ब्राह्मण
  • यजुर्वेद – शतापत और तैत्तरिया
  • सामवेदपंचविशा, चांदोग्य, शद्विन्श और जैमिन्‍या
  • अथर्ववेद - गोपाथा
c. अरण्यकसब्राह्मणों से सम्बन्धों को समाप्त करते हुए, तपस्‍वियों तथा वनों में रहने वाले छात्रों के लिए मुख्यतः लिखी गई पुस्तक को अरण्यकस भी बोला जाता है।
d. उप-निषद – वैदिक काल के अंत में प्रदर्शित होने पर, उन्होंने अनुष्ठानों की विलोचना की और सही विश्वास और ज्ञान पर प्रकाश डाला।
नोट- सत्यमेव जयते, मुंडका उपनिषद से लिया गया हैं।
2. वैदिक साहित्य – बाद में वैदिक युग के बाद, बहुत सारे वैदिक साहित्य विकसित किए गए, जो संहिताओं से प्रेरित थे जो स्मृती-साहित्य का पालन करते हैं, जो श्रुति-शब्द की ओर मुथ परंपरा के ग्रंथों में लिखा गया था। स्मृति परंपरा में महत्वपूर्ण ग्रंथों को निम्न भागों में विभाजित किया गया है।
a. वेदांग
  1. शिक्षा - स्वर-विज्ञान
  2. कल्पसूत्र रसम रिवाज
    सुल्वा सूत्र
    गृह्य सूत्र
    धर्मं सूत्र
  3. व्याकरण ग्रामर
  4. निरुक्ता - शब्द-साधन
  5. छंद - मैट्रिक्स
  6. ज्योतिष - एस्ट्रोनोमी
b. स्मृतियां
  1. मनुस्मृति
  2. यज्नावाल्क्य स्मृति
  3. नारद स्मृति
  4. पराशर स्मृति
  5. बृहस्पति स्मृति
  6. कात्यायना स्मृति
c. महाकाव्य
  1. रामायण
  2. महाभारत
d. पुराण
  1. 18 महापुराणब्रह्मा, सूर्य, अग्नि, शैव और वैष्णव जैसे विशिष्ट देवताओं के कार्यों को समर्पित। इसमें भागवत पुराण, मत्स्य पुराण, गरुड़ पुराण आदि शामिल हैं।
  2. 18 उप-पुराण – इसके बारे में कम जानकारी उपलब्ध है।
e. उपवेद
  1. आयुर्वेद - दवा
  2. गन्धर्ववेद- संगीत
  3. अर्थवेद - विश्वकर्मा
  4. धनुर्वेद - तीरंदाजी
f. शाद-दर्शन या भारतीय दार्शनिक विद्यालय
  1. संख्या
  2. योग
  3. न्याय
  4. वैशेशिका
  5. मीमांसा
  6. वेदांता

3. पीजीडब्ल्यू-लोहा चरण संस्कृति और बाद में वैदिक अर्थव्यवस्था

गंगा ने संस्कृति का केंद्र होने के साथ ही पूरे उत्तर भारत में अपना प्रसार किया। 1000 ईसा पूर्व से धारवाड़, गांधार और बलूचिस्तान क्षेत्र में लौह अवयवों का प्रकटन। लोहे को श्यामा या कृष्ण आयस के रूप में जाना गया था और शिकार में, जंगलों को साफ़ करने आदि में इस्तेमाल किया गया था।

a. प्रादेशिक विभाग
  1. आर्यावर्त उत्तर भारत
  2. मध्यदेशमध्य भारत
  3. दक्षिणापाहदक्षिण भारत
b. चरवाहों से आजीविका के प्रमुख स्रोतों का संक्रमण, व्यवस्थित और आसीन कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का संक्रमण। चावल (वीहरी), जौ, गेहूं और दाल मुख्य उपज थे।
c. कला और शिल्प लौह और कॉपर के उपयोग के साथ सुधार हुआ। बुनाई, चमड़े के काम, मिट्टी के बर्तनों और बढ़ई के काम ने भी बड़ी प्रगति की।
d. कस्बों या नगरों की वृद्धि होने लगी। लेकिन बाद में वैदिक चरण एक शहरी चरण में विकसित नहीं हुआ। कौशंबी और हस्तिनापुर को प्रोटो-शहरी साइट्स कहा जाता था।
e. वैदिक ग्रंथों में समुद्र और सागर यात्राओं का उल्लेख भी किया गया है।

4. राजनीतिक संगठन

a. सभालोकप्रिय असेंबलियों ने अपना महत्व खो दिया। सभा और समिति का चरित्र बदल गया, और यह विधा गायब हो गई। अमीर रईसों और प्रमुखों ने इन विधानसभाओं पर हावी होना शुरू कर दिया।
  1. इन विधानसभाओं में अब महिलाओं की उपस्थिति की अनुमति नहीं थी। उन्होंने धीरे-धीरे उनके महत्‍व को खो दिया।
b. बड़े राज्यों का गठन राजाओं को शक्तिशाली और आदिवासी प्राधिकरण बनने के लिए प्रादेशिक बन गया। राष्ट्र इस बात का संकेत करता है कि इस चरण में राज्य पहले दर्शित था |
c. हालांकि मुख्य चुनाव की आवश्‍यकता खत्‍म हो गई, यह पद आनुवंशिक हो गए। लेकिन भरत युद्ध दिखाता है कि किंग्सपैथ का कोई रिश्तेदारी नहीं है।
d. राजा अपनी शक्तियों को मजबूत करने के लिए विभिन्न अनुष्ठान किये।| उनमें से कुछ इस प्रकार हैं :
  1. अश्वमेध – एक ऐसे क्षेत्र पर निर्विवाद नियंत्रण जिसमें शाही घोड़ा बिना किसी बाधा के दौड़ आये।
  2. वाजपेय- रथ दौड़
  3. सर्वोच्च शक्तियां प्रदान करने के लिए राजसूया बलिदान
e. संग्रिहित्री – कर और दान इकट्ठा करने के लिए नियुक्त किया गया एक अधिकारी
f. यहां तक कि इस चरण में, राजा के पास एक स्थायी सेना नहीं थी और युद्ध के समय में जनजातीय इकाइयां जुटाई जाती थीं।
 5. सामाजिक संगठन
a. चतुरवर्ण प्रणाली धीरे-धीरे ब्राह्मणों की बढ़ती शक्ति के कारण विकसित हुई क्योंकि बलिदान कर्मकांड अधिक सामान्य हो रहे थे। लेकिन अब भी वर्ण प्रणाली बहुत प्रगति नहीं कर पाई।
b. वैश्य ही सामान्य लोग थे जिन्होंने दान अर्पित किया, जबकि ब्राह्मण और क्षत्रिय वैश्यों से एकत्र हुए धन पर रहते थे। तीन वर्ण उपानाना के लिए हकदार थे और गायत्री मंत्र का पाठ था जो शूद्र से वंचित था।
c. गोत्र तब शुरू हुआ, जब गोत्र एक्ज़ैग्मी का अभ्यास शुरू हुआ।
d. आश्रम (ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वाणप्रस्थ और संयासी) अच्छी तरह से स्थापित नहीं थे।

6. भगवान, अनुष्ठान और दर्शन

a. ब्राह्मणवादी प्रभाव का पंथ बढ़ती रस्में और बलिदानों के साथ विकसित हुआ।
b. इंद्र और अग्नि ने उनके महत्व को खो दिया, जबकि प्रजापति ने रुद्र और विष्णु के साथ महत्वपूर्ण पद हासिल कर लिया।
c. मूर्तिपूजा होने लगी।
d. लोगों ने भौतिक कारणों के लिए भगवान की पूजा की।
e. बलिदानों के साथ बलिदान के अनुष्ठानों और सूत्रों के साथ बलिदान अधिक महत्वपूर्ण हो गए।
f. अतिथि को गोघना या जिसे मवेशियों को खिलाया गया था, के रूप में जाना-जाने लगा।
g. ब्राह्मणों ने अपने दान के उपहारों के रूप में प्रदेशों / भूमि के साथ सोने, कपड़े और घोड़ों की मांग की।

 

सिन्धु घाटी सभ्यता के महत्वपूर्ण तथ्य | Important Question Sindhu Ghati Sabhyata

सिन्धु घाटी सभ्यता के महत्वपूर्ण तथ्य

सिन्धु घाटी सभ्यता के महत्वपूर्ण तथ्य



जॉन मार्शल, ‘सिंधु घाटी सभ्‍यता’ शब्‍द का प्रयोग करने वाले पहले विद्वान थे। सभ्‍यता का विकास 2500 ईसा पूर्व – 1750 ईसा पूर्व में हुआ।

भौगोलिक विस्‍तार

1.सीमा: सिन्धु घाटी सभ्यता, पश्चिम में सुत्कागंदोर (बलुचिस्तान) से पूर्व में आलमगिरपुर (पश्चिमी उत्तर प्रदेश) तक और उत्तर में मंडु (जम्मू) से दक्षिण में डायमाबाद (अहमदनगर, महाराष्ट्र) तक फैली हुई हैं ।


सिन्धु सभ्यता के प्रमुख स्थल व खोजकर्ता:
स्थल अवस्थिति खोजकर्ता का नाम वर्ष नदी/सागर तट
हड़प्पा मांटगोमरी (पाकिस्तान) दयाराम साहनी 1921 रावी
मोहनजोदड़ो लरकाना (पाकिस्तान) राखालदास बनर्जी 1922 सिन्धु
रोपड़ पंजाब यज्ञदत्त शर्मा 1953 सतलज
लोथल अहमदाबाद (गुजरात) रंगानाथ नाथ राव 1954 भोगवा नदी
कालीबंगा गंगानगर (राजस्थान) ए. घोष 1953 घग्घर
चन्हूदड़ो सिंध (पाकिस्तान) एन. जी. मजूमदार 1934 सिन्धु
सुत्कांगेडोर बलूचिस्तान (पाकिस्तान) आरेल स्टाइन 1927 दाश्क
कोटदीजी सिंध (पाकिस्तान) फज़ल अहमद खां 1955 सिन्धु
अलमगीरपुर मेरठ यज्ञदत्त शर्मा 1958 हिंडन
सुरकोटदा कच्छ (गुजरात) जगपति जोशी 1967
रंगपुर कठियावाड़ (गुजरात) माधोस्वरूप वत्स 1953-54 मादर
बालाकोट पाकिस्तान डेल्स 1979 अरब सागर
सोत्काकोह पाकिस्तान अरब सागर
बनवाली हिसार (हरियाणा) आर. एस. बिष्ट 1973-74
धौलावीरा कच्छ (गुजरात) जे.पी. जोशी 1967
पांडा जम्मू-कश्मीर चिनाब
दैमाबाद महाराष्ट्र आर. एस. विष्ट 1990`प्रवरा
देसलपुर गुजरात के. वी. सुन्दराजन 1964
भगवानपुरा हरियाणा जे.पी. जोशी सरस्वती नदी




3. प्रमुख शहर
शहर नदी पुरातात्‍विक महत्‍व
हड़प्‍पा (पाकिस्तान) रावी 6 अनाजों की एक पंक्‍ति, देवी माता की मूर्ति
मोहनजोदड़ो (पाकिस्तान) सिंधु अनाज, बृहत स्‍नानागार, पशुपति महादेव की मूर्ति, दाढ़ी वाले आदमी की मूर्ति और एक नर्तकी की कांस्‍य की मूर्ति
लोथल (गुजरात) भोगवा बंदरगाह शहर, दोहरी कब्रगाह, टेराकोटा की अश्‍व की मूर्तियां
चन्‍हूदड़ो (पाकिस्तान) सिंधु बिना दुर्ग का शहर
धौलावीरा (गुजरात) सिंधु तीन भागों में विभाजित शहर
कालिंबंगा (राजस्थान) घग्घर जुते हुए खेत
बनवाली (हरियाणा) घग्घर -
सुत्कागंदोर (पाकिस्तान) - -
सुकोताडा (पाकिस्तान) - -



सिन्धु घाटी सभ्यता GK Questions

  1. प्राचीन सिंधु सभ्यता Ancient sindhu civilization कहा तक विस्तृत थी – पंजाब ,राजस्थान ,गुजरात,उत्तरप्रदेश ,हरियाणा ,सिंध और बलूचिस्तान
  2. Harappa Society हड्प्पा कालीन समाज किन वर्गों में विभक्त था- विद्वान ,योद्धा ,व्यापारी और श्रमिक
  3. हड्प्पा सभ्यता के सम्पूर्ण क्षेत्र का आकर किस प्रकार का था – त्रिभुजाकार
  4. प्राचीन इतिहास Ancient History में सेंधव सभ्यता की ईंटो अलंकरण किस स्थान से मिला है – कालीबंगा
  5. सिंधु सभ्यता के लोगों का Main Occupation प्रमुख व्यवसाय क्या था – व्यापार
  6. प्राचीन इतिहास में Sindhu Civilisation सिंधु सभ्यता के घर किससे बनाये जाते थे – ईंट
  7. हड्प्पा वासी लोग किस वस्तु के उत्पादन में सर्वप्रथम थे – कपास Cotton
  8. हड्प्पा काल Harappa की मुद्राओं के निर्माण में मुख्य रूप से किसका प्रयोग किया गया था – टैराकोटा Teracotta
  9. सिंधु सभ्यता का सर्वाधिक उपयुक्त नाम क्या था – Harappa civilization हड्प्पा सभ्यता
  10. किस वर्ष Harappa Civilization हड्प्पा सभ्यता की खोज हुई थी – वर्ष 1921
  11. हड्प्पा सभ्यता Harappa Civilization के लोगो की सामाजिक पद्धति – उचित समतावाद
  12. स्वतंत्रता से पूर्व भारत में सबसे अधिक संख्या में हड्प्पा युगीन स्थलों की खोज किस प्रान्त में हुई थी – Gujrat गुजरात
  13. प्राचीन सिंधु सभ्यता Sindhu Civilisataion में वृहत स्नानगार कहाँ पाया गया है – मोहनजोदड़ो
  14. हड्प्पा के मिट्टी के बर्तनों में सामान्यत: किस तरह के रंगों का प्रयोग हुआ है – लाल
  15. प्राचीन इतिहास में Mohanjodado मोहनजोदड़ो को किस अन्य नाम से जाना जाता है – मृतकों का टीला
  16. प्राचीन सिंधु सभ्यता कालीन के हड्प्पा लोग अपने नगरो व घरों के विन्यास के लिए कौन सी पद्धति अपनायी थी – Grid System ग्रिड पद्धति
  17. मोहनजोदड़ो से प्राप्त पशुपति शिव आद्द शिव मुहर में किन -किन जानवरों का अंकन हुआ है – व्याघ्र ,हाथी ,गैंड़ा ,भैंसा व हिरण
  18. Mohanjodado मोहनजोदड़ो की सबसे बड़ी ईमारत किसे मणि जाती है – विशाल अन्नागार / धान्यकोठार
  19. हड्प्पा मुहरें Harappa Incription अधिकांश किससे बनी हुई है – सेलखड़ी
  20. किस हड्प्पा कालीन स्थल से पुजारी को प्रस्तर मूर्ति प्राप्त हुई है – हड्प्पा
  21. किस हड्प्पा कालीन Harappa Civilization स्थल से नृत्य मुद्रा वाली स्त्री की कांस्य मूर्ति प्राप्त हुई है – मोहनजोदड़ो
  22. किस नदी के किनारे हड्प्पा कलीन स्थल रोपड़ स्थित है – सतलज
  23. प्राचीन इतिहास में Sindhu Valleyसिंधु घाटी के लोग किसमे विश्वास करते थे – मातृशक्ति में
  24. प्राचीन इतिहास में किस सिंधुकालीन स्थल से एक ईंट पर बिल्ली का पीछा करते हुए कुत्ते के पंजो के निशान मिले है – चुन्हुदड़ो
  25. किस स्थान से हड्प्पा सभ्यता के जोते हुए खेत का साक्ष्य मिला है – कालीबंगां
  26. मोहनजोदड़ो Mohnjodado कहाँ स्थित है – सिंध पकिस्तान
  27. हड्प्पा वासी लोग किन- किन धातुओं का प्रयोग करते थे – सोना ,चाँदी ,तांबा
  28. सिंधु घाटी सभ्यता की विकसित अवस्था में किस स्थल से घरों के अवशेष मिले है – मोहनजोदडों
  29. हड़प्पा सभ्यता Harappa civilization का सबसे पूर्वी स्थल कौन-सा है – आलमगीर
  30. हड्प्पा संस्कृति Harappa culture की जानकारी का प्रमुख श्रोत क्या है – पुरातात्विक खुदाई
  31. सिंधु सभ्यता किससे संबधित है – आद्य –ऐतिहासिक युग से
  32. प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता Sindhu Indus Valley को वर्तमान में क्या कहा जाता है? – हड्प्पा सभ्यता।


Sindhu Ghati Sabhyata GK

  1. प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता Sindhu Indus Valley का काल कब से कब तक था? – 2500 ई॰ पूर्व से 1500 ई॰ पूर्वतक
  2. प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता को क्या कहा जाता है? – नगरीय सभ्यता।
  3. प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता किन नदियों के किनारे विकसित हुई थी? – सिन्धु व उसकी सहायक नदियों केकिनारे
  4. प्राचीन हड़प्पा नगर किस नदी के किनारे स्थित था? – रावी नदी के।
  5. प्राचीन हड्प्पा वासी कहाँ के मूल निवासी थे? – फिनीशिया
  6. प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता का प्रधान बन्दरगाह कौन था – लोथल बन्दगाह
  7. प्राचीन सिन्धुवासी किसकी उपासना करते थे? – मातृदेवी और शिवलिंग की
  8. प्राचीन सिन्धुवासी किस पशु को पवित्र मानते थे? – साँड
  9. प्राचीन हड़प्पा संस्कृति की मुद्राओं एव पक्की मिटटी की कलाकृतियों में किन पशुओ का चित्रण किया गया है –हाथी, बाघ , हिरन , गेंडा तथा भैस
  10. सिंधु घाटी की सभ्यता और वैदिक सभ्यता में प्रमुख अंतर क्या है – पहली नगरिया थी , जबकि दूसरी ग्रामीण
  11. हड़प्पाकालीन सभ्यता का विशाल कोठार अनाज संग्रहण Huge Pantry grain storage करने का स्थान कहा मिला है– मोहनजोदड़ो
  12. सिंधु घटी सभ्यता के अवशेष प्राप्त लोगो का प्रमुख धन्धा क्या था – कृषि
  13. हड़प्पा सभ्यता Harappa civilization का कौन सा स्थल भारत में स्थित नहीं है – बालकोट
  14. हड़प्पन लोगो Harappa civilization को किसकी जानकारी नहीं थी – लोहा
  15. किसके प्रमाण मिलने के कारण से सिन्धु घाटी कि सभ्यता को आर्य पूर्व सभ्यता कहा जाता है – बर्तन
  16. प्राचीन इतिहास में सबसे पहले कौन सा हड़प्पाकालीन स्थल खोजा गया था – हड़प्पा
  17. प्राचीन इतिहास में सिन्धु सभ्यता का पतन नगर कौन सा है – लोथल
  18. सिंधु घाटी स्थल Kalibanga कालीबंगा किस प्रदेश में स्थित है – राजस्थान



हड़प्पा सभ्यता या सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़े महत्वपूर्ण  तथ्य

1. 
हड़प्पा सभ्यता के प्रथम अवशेष हड़प्पा नामक स्थान से प्राप्त हुए थे. हड़प्पा नामक स्थान से प्राप्त अवशेषों के कारण ही इस सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता कहा गया.

2. 
हड़प्पा सभ्यता 2500 ईसा पूर्व से 1500 ईसा पूर्व तक फली फूली.हड़प्पा सभ्यता की तिथि ज्ञात करने के लिए कार्बन डेटिंग पद्धति का सहारा लिया गया.

3. 
हड़प्पा सभ्यता को भारतीय उपमहाद्वीप की प्रथम नगरीय सभ्यता माना जाता है.
4. 
हड़प्पा सभ्यता को सिंधु घाटी सभ्यता का नाम इसके प्रमुख नगर मोहनजोदड़ो की खुदाई के कारण मिला. क्योंकि मोहनजोदड़ो की खुदाई सिंधु नदी के किनारे हुई थी. इसी सिंधु नदी के कारण इसे सिंधु घाटी सभ्यता कहा जाने लगा.

5. 
सिंधु घाटी सभ्यता के कुछ प्रमुख नगरों की खोज नदियों के किनारे हुई जिनके नाम और नदी इस प्रकार है
प्रमुख नगर              नदिया
हड़प्पा                   रावी नदी
मोहनजोदड़ो           सिंधु नदी
लोथल                 बोगवा नदी
कालीबंगा             घग्गर नदी
रोपड़                  सतलुज नदी
आलमगीरपुर         हिंडन नदी
कुणाल                सरस्वती नदी
बनवाली              सरस्वती नदी
 
चन्हुदड़ो               सिंधु नदी

6. 
सिंधु घाटी सभ्यता का विस्तार उत्तर में जम्मू से लेकर दक्षिण में नर्मदा के किनारे तक और पश्चिम में बलूचिस्तान के मकरान समुद्र तट से लेकर उत्तर पूर्व में मेरठ तक था.

7. 
सिंधु सभ्यता का क्षेत्रफल 12,99,600 वर्ग किलोमीटर तथा अकार त्रिभुजाकार था.
8. 
सिंधु सभ्यता मिस्त्र सभ्यता से भी बड़ी सभ्यता थी.
9. 
सिंधु घाटी सभ्यता को कांस्य युगीन सभ्यता कहा जाता है.

10. 
सिंधु सभ्यता के नगर तथा उनके खोजकर्ता इस प्रकार हैं.
      
नगर                                  खोजकर्ता
     
हड़प्पा                             दयाराम साहनी
 
मोहनजोदड़ो                        राम लद्दाख बनर्जी
   
लोथल                                 रंगनाथ राव
 
कालीबंगा                             ब्रजवासी लाल, अमलानंद घोष
   
बनवाली                             रविंद्र सिंह बिष्ट
   
रोपड़                                   यक्षदत्त शर्मा
 
चन्हुदड़ो                             गोपाल मजूमदार

11. 
सिंधु घाटी सभ्यता की नगर विन्यास पद्धति 'Grid System ' पर आधारित थी.
12. 
सिंधु सभ्यता के नगरों की गलियां चौड़ी  सीधी हुआ करती थी तथा एक दूसरे को समकोण पर काटती थी.
13. 
अधिकतर हड़प्पा वासी अपने घरों को दो मंजिल के बनाते थे.
14. इन घरों के प्रमुख दरवाजे बाहर सड़क की तरफ खुलते थे.
15. 
भारत में वास्तुकला का आरंभ सिंधु वासियों ने ही किया था.
16. 
सिंधु सभ्यता की सबसे बड़ी इमारत का नाम अन्नागार है जो मोहनजोदड़ो की खुदाई से मिली.
17. 
मोहनजोदड़ो की खुदाई से एक विशाल स्नानघर भी मिला है.
18. 
सिंधु सभ्यता वासियों के घरों के फर्श आमतौर पर कच्चे होते थे सिर्फ कालीबंगा से कुछ पक्के फर्श के साक्ष्य मिले हैं.
19. 
विश्व में सर्वप्रथम कपास की खेती करने का श्रेय सिंधु वासियों को ही जाता है.
20. 
सिंधु सभ्यता वासी चावल और बाजरा की खेती करना भी जानते थे चावल और बाजरा के साक्ष्य लोथल से मिले हैं

21. 
लोथल एक ऐसा स्थान था जो सिंधु सभ्यता वासियों का प्रमुख बंदरगाह था.
22. 
बनावली से मिले हल के प्रमाण के आधार पर कहा जा सकता है कि यह लोग हल चलाना भी जानते थे.
23. 
कालीबंगा की खुदाई में जूते हुए खेत के प्रमाण भी मिले हैं.
24. 
सिंधु वासी हाथी और घोड़े से परिचित थे परंतु उन्हें फालतू नहीं बना सके.
25. 
सुरकोटदा की खुदाई से घोड़े के होने के प्रमाण मिले हैं.
26. 
चन्हुदड़ो की खुदाई में एक ईंट पर बिल्ली का पीछा करते हुए कुत्ते के पंजों के निशान भी मिले है.
27.  
सिंधु वासियों को गैंडा,बंदर, भालू, आदि जंगली जानवरों का ज्ञान था परंतु जंगल के राजा शेर को नहीं जानते थे .
28. 
सिंधु सभ्यता के समय मुद्रा प्रणाली का प्रचलन नहीं था.
29.  
यह लोग क्रय विक्रय वस्तु विनिमय आधार पर व्यापार किया करते थे.
30.  
सिंधु सभ्यता के लोग अन्य सभ्यता के लोगों के साथ भी व्यापार करते थे.
सिंधु सभ्यता के लोग तांबा, चांदी, सोना, शीशा, आदि का व्यापार करते थे यह लोग अफगानिस्तान, ईरान, दक्षिण भारत, तक व्यापार किया करते थे.
31. 
हड़प्पा की खुदाई से मिले साक्ष्यों के आधार पर कहा जा सकता है यह सभ्यता व्यापारी एवं शिल्पियों के हाथों में थी.
32. 
सन 1999 तक सिंधु सभ्यता के 1056 नगरों की खोज हो चुकी थी.1056 नगरों की खोज के कारण ही इस सभ्यता को नगरीय सभ्यता कहां गया.
33. 
सिंधु वासी अपने आभूषणों में सोना, चांदी, तांबा, धातु का प्रयोग करते थे साथ ही यह लोग कीमती पत्थर से बने आभूषणों को भी बहुत चाव से पहनते थे.
34. 
सिंधु सभ्यता के लोग मंदिर नहीं बनाते थे ऐसा इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि अब तक की खुदाई से एक भी मंदिर के प्रमाण नहीं मिले हैं.
35. 
हड़प्पा वासी मुख्य रूप से कूबड़ सांड की पूजा करते थे.
36. 
हड़प्पावासी वृक्षों की पूजा भी करते थे खुदाई से मिले पीपल एवं बबूल के पेड़ों के साक्ष्यों के आधार पर ऐसा कहा जा सकता है.
37. 
सिंधु वासी स्वास्तिक चिन्ह बनाना जानते थे मोहनजोदड़ो की खुदाई से एक मोहर पर स्वास्तिक चिन्ह के निशान मिले है.
38. 
सिंधु सभ्यता की लिपि भाव चित्रात्मक थी.
39. 
सिंधु लिपि को पढ़ने का सर्व प्रथम प्रयास L A vadel ने किया था.
40. 
सिंधु सभ्यता की लिपि को अब तक समझा नहीं जा सका है.
41. 
सिंधु वासी लिखते समय चिड़िया, मछली,मानवकृति आदि का प्रयोग किया करते थे. सिंधु लिपि दाएं से बाएं लिखी जाती थी
42. 
सिंधु सभ्यता को ProHistoric युग का माना गया है.
43. 
सिंधु सभ्यता के मुख्य निवासी द्रविड़ और भूमध्यसागरीय थे
44. 
सिंधु सभ्यता के सर्वाधिक स्थल गुजरात में खोजे गए हैं.
45. 
सिंधु सभ्यता वासियों ने मनके बनाने के लिए कारखाने लगा रखे थे.
46. 
कारखानों के साक्ष्य लोथल और चन्हुदडो से प्राप्त हुए हैं
47. 
सिंधु सभ्यता की मुख्य फसलें गेहूं और जो थी.
48. 
सिंधु सभ्यता वासी तौल की इकाई में 16 का अनुपात रखते थे.
49. 
सिंधु सभ्यता के लोग धरती की पूजा करते थे ऐसा माना जाता है सिन्धुवासी अपने खेतों की ऊर्वरक शक्ति बढ़ाने के लिए धरतीमाता की पूजा करते थे.
50. 
सिंधु सभ्यता वासी मातृदेवी की भी पूजा करते थे.
51. सिंधु सभ्यता मातृ प्रधान सभ्यता थी.
52. 
कहा जाता है पर्दाप्रथा सिंधु सभ्यता में प्रचलित थी.
53. 
क्षेत्रफल की दृष्टि से मोहनजोदड़ो सिंधु सभ्यता का सबसे बड़ा नगर था.
54. 
हड़प्पाकालीन स्थलों की खुदाई से मिले प्रमुख साक्ष्य के आधार पर कहा जा सकता है हड़प्पा वासी कुशल कारीगरी करना जानते थे.
55. 
हड़प्पा नगर की खोज 1921 में दयाराम साहनी द्वारा की गई थी.
56. 
हड़प्पा की खुदाई से कुछ महत्वपूर्ण चीजें प्राप्त हुई हैं जैसे शंख का बना हुआ बैल, नटराज की आकृति वाली मूर्ति, पैर में सांप दबाए गरुड़ का चित्र ,मछुआरे का चित्र, आदि
57. 
मोहनजोदड़ो की खोज 1922 में राम लद्दाख बनर्जी द्वारा की गई थी
58. 
मोहनजोदड़ो की खुदाई से भी कुछ महत्वपूर्ण चीजे मिले हैं. जैसे पक्की ईट ,कांसे की एक नर्तकी की मूर्ति,  सीडी आदि के साक्ष्य मिले हैं.
59. 
मोहनजोदड़ो को मृतकों का टीला भी कहा जाता है.
60. 
सिंधु सभ्यता के प्रमुख नगर लोथल से भी महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं लोथल से बत्तख, बारहसिंघा, गोरिल्ला, दो मुंह वाले राक्षस के अंकन वाली मुद्राएं प्राप्त हुई है.
61. 
सिंधु सभ्यता का एक प्रमुख नगर कालीबंगा है जो घाघर नदी के किनारे राजस्थान में स्थित है.
62. 
कालीबंगा का शाब्दिक अर्थ 'काली चूड़ियां' है
63. 
कालीबंगा से विकसित हड़प्पा सभ्यता के साक्ष्य मिले.
64. 
जूते हुए खेत, सरसों के साक्ष्य से भी कालीबंगा से ही प्राप्त हुए हैं एक सींग वाले देवता के साक्ष्य भी कालीबंगा से मिले है .
65. 
सिंधु सभ्यता में मानव के साथ कुत्ते को दफनाने की प्रथा भी प्रचलित थी ऐसी ही एक प्रथा के साक्ष्य रोपड़ से प्राप्त हुए हैं.
66. 
हरियाणा के बनावली से हल की आकृति वाला खिलौना प्राप्त हुआ है अच्छे किस्म की जो भी यही से प्राप्त हुई है.
67. 
सिंधुवासी खेलो में भी रूचि रखते थे.
68. 
सिंधुवासी सतरंज का खेल जानते थे.
69. 
सिंधु सभ्यता को 'सिंधु सरस्वती' सभ्यता के नाम से भी जाना जाता है ऐसा इसलिए कहा जाता है क्युकी सरस्वती नदी के किनारे भी इस सभ्यता के साक्ष्य मिले हैं.
70. 
प्रथम बार काँसे के प्रयोग के कारण इस सभ्यता को कांस्य युगीन सभ्यता कहा जाता है.
71. 
सिंधु सभ्यता वासियों का प्रमुख व्यवसाय कृषि पर आधारित था.यह लोग जो, बाजरा ,चावल, कपास आदि की खेती करते थे
72. 
हड़प्पा में पकी मिट्टी की स्त्री मूर्तिकाएं भारी संख्या में मिली हैं। एक मूर्ति में स्त्री के गर्भ से निकलता एक पौधा दिखाया गया है। विद्वानों के अनुसार यह पृथ्वी देवी की प्रतिमा है.
73. 
अब तक ज्ञात खुदाई में मात्र 3 प्रतिशत हड़प्पा सभ्यता को ही खोजा गया है.
74. 
लोथल से युगल शवाधान का साक्ष्य मिला है साक्ष्य के आधार पर कहा जा सकता है हिंदू सभ्यता में सती प्रथा का प्रचलन था.
75. 
सिंधु सभ्यता में भक्तिवाद ,पुनर्जन्म आदि के साक्ष्य भी मिले हैं.
76. हड़प्पा नगर वासियों के अधिकतर घर पक्की ईंटों के बने होते थे.
77. 
सिंधु सभ्यता में फलों की खेती बहुत कम मात्रा में होती थी.
78. 
बनावली से मिले बैलगाड़ी के खिलौने के साक्ष्य के आधार पर कहा जा सकता है कि यह लोग खेती के लिए बैलगाड़ी का प्रयोग करते थे.
79. 
हड़प्पा संस्कृति प्रगति का मुख्य कारण वहा के लोगो का आत्मनिर्भर होना था.
80. 
सूत्रों के अनुसार हड़प्पा घाटी के अधिकांश लोगो का जीवन समृद्ध था। हड़प्पा में संसाधनों के एकत्रीकरण की व्यवस्था ही संस्कृति के विकास का कारण बनी.
81. 
इस सभ्यता की समकालीन सभ्यता मेसोपोटामिया थी.
82. 
हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो में असंख्य देवियों की मूर्तियां प्राप्त हुई हैं। ये मूर्तियां मातृदेवी या प्रकृति देवी की हैं.
83. 
यहां हुई खुदाई से पता चला है कि हिन्दू धर्म की प्राचीनकाल में कैसी स्थिति थी
84. 
सिन्धु घाटी की सभ्यता को दुनिया की सबसे रहस्यमयी सभ्यता माना जाता है, क्योंकि इसके पतन के कारणों का अभी तक खुलासा नहीं हुआ है.
85. 
चार्ल्स मेसन ने वर्ष 1842 में पहली बार हड़प्पा सभ्यता को खोजा था। इसके बाद दया राम साहनी ने 1921 में हड़प्पा की आधिकारिक खोज की थी.
86. 
हड़प्पा से कई ऐसी चीजें मिली हैं, जिन्हें हिन्दू धर्म से जोड़ा जा सकता है। पुरोहित की एक मूर्ति, बैल, नंदी, मातृदेवी, बैलगाड़ी और शिवलिंग आदि हिंदू धर्म के प्रतीक है.
87. 1940
में खुदाई के दौरान पुरातात्विक विभाग के एमएस वत्स को एक शिव लिंग मिला जो लगभग 5000 पुराना है.
88. 
मोहनजोदड़ो को सिंध का बाग़ भी कहा जाता है.
89. 
ऐसा माना जाता है मोहनजोदड़ो की स्थापना आज से 4616 वर्ष पूर्व हुई थी.
90.  
इतिहासकारों के अनुसार हड़प्पा सभ्यता के निर्माता द्रविड़ लोग थे.
91. 
इतिहाकारों के अनुसार सबसे पहली बार कपास उपजाने का श्रेय हड़प्पावासियों को ही दिया जाता है.
92. 
हड़प्पा सभ्यता से प्राप्त मोहरो को सर्वोत्तम कलाकृतियों का दर्जा प्राप्त है.
93. 
हड़प्पा वासी मिटी के बर्तनो पर लाल रंग का प्रयोग करते थे.
94. 
मोहनजोदड़ों से प्राप्त विशाल स्नानागार में जल के रिसाव को रोकने के लिए ईंटों के ऊपर जिप्सम के गारे के ऊपर चारकोल की परत चढ़ाई गई थी जिससे पता चलता है कि वे चारकोल के संबंध में भी जानते थे.
95. 
पुरातात्विक विभाग के सर्वे के अनुसार हड़प्पा काल के अंतिम समय में हड़प्पा घाटी के लोग कयी बीमारियों से जूझ रहे थे.
96. 
अंतिम समय में सिन्धुवासी मुख्य रूप से कार्नियो-फेसिअल मानसिक आघात नामक बीमारी से ग्रसित थे, यह बीमारी तेज़ी से फेल रही थी.
97. 
कहा जाता है की हड़प्पा घाटी के लोग आर्थिक रूप से समृद्ध होने के बावजूद भी स्वस्थ नहीं रहते थे.
98. 
 1500 ईसा पूर्व के आसपास सिंधु सभ्यता का पतन हो गया
99.  1947 में पाकिस्तान बनने के बाद सिंधु सभ्यता के दो प्रमुख नगर मोहनजोदड़ो और हड़प्पा पाकिस्तान का हिस्सा बन गए.
100. भारत में सिंधु सभ्यता का प्रमुख स्थल धोलावीरा है